Raj Kapoor Birth Anniversary: राज कपूर को जब पिता ने बारिश में भीगते हुए भेजा था स्कूल, जाने इसकी वजह

राज कपूर का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के शो मैन बनने तक का सफर आसान नहीं रहा है. राज कपूर की सफलता में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर का बड़ा हाथ था. 14 दिसंबर 1924 में पैदा हुए राज कपूर ने बतौर एक्टर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर कैमरे के आगे और पीछे करीब 50 साल काम किया था. उन्होंने अपने फिल्मी जीवन में तमाम पुरस्कार हासिल किए. 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और 11 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स उनके नाम है. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता और फिल्म चितेरे के नाम कई किस्से कहानियां मशहूर हैं लेकिन आज उनके बचपन से जुड़ी कुछ बात बताते हैं.

पृथ्वीराज कपूर ने राज कपूर को गढ़ा था
राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर अपने बेटे को जीवन की हर बारीकी से बचपन से ही रुबरू करवाने लगे थे. राज कपूर की बेटी ऋतु नंदा ने एक बार बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि ‘राज कपूर दूसरे बच्चों की तरह ही ट्राम से स्कूल जाते थे. एक दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी. राज ने अपनी मां से पूछा कि क्या वो आज कार से स्कूल जा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे पिताजी से पूछ कर बताती हूं. उन्होंने जब पूछा तो कहा कि बारिश में भीगते हुए स्कूल जाने में भी एक तरह का मजा है, उसको इसका भी अनुभव लेने दो. राज कपूर ने जब ये सुना तो खुद ही कहा कि मैं ट्राम से ही स्कूल जाऊंगा’.

भीगते हुए गए थे राज कपूर स्कूल
जब पृथ्वीराज कपूर ने अपने बेटे राज कपूर को भीगते हुए स्कूल जाते देखा तो अपनी पत्नी से कहा कि देखना एक दिन इस लड़के के पास मुझसे भी अधिक फैंसी कार होगी’. हालांकि राज कपूर की पसंदीदा कार जीवन भर एंबेसडर रही. वह हमेशा एंबेसडर से चला करते थे. उनके पास एक मर्सिडीज कार भी थी लेकिन उसका इस्तोमाल उनकी पत्नी कृष्णा कपूर ही किया करती थीं. राज कपूर को बचपन से ही उनके पिता ने उन्हें आगे के जीवन के लिए तैयार किया था. शायद यही वजह है कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में तमाम प्रयोग किए.

जब जवाहर लाल नेहरू रह गए थे भौचक्के
राज कपूर सिर्फ इंडिया ही नहीं विदेशों में भी बेहद लोकप्रिय थे. उनकी फिल्मों और गाने के दीवाने सरहद पार लोग भी हुआ करते थे, या यूं कहे कि आज भी हैं. राज कपूर की लोकप्रियता को लेकर एक दिलचस्प किस्सा है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जब रूस गए तो उन्हें सरकारी भोज दिया गया. इस दौरान वहां के तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर निकोलाई बुल्गानिन के बोलने की बारी आई तो उन्होंने अपने मिनिस्टर्स के साथ राज कपूर की फिल्म का फेमस गाना ‘आवारा हूं’ गाया तो नेहरू के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा.

रणधीर कपूर, ऋतु नंदा रो पड़े थे
ऐसा एक बार ही नहीं हुआ था, मीडिया खबरों के मुताबिक जब 1996 में राज कपूर के बेटे रणधीर कपूर और बेटी ऋतु नंदा चीन गए थे, लोग उन्हें देखते ही लोग ‘आवारा हूं’ गाने लगते. अपने पिता के लिए अगाध प्रेम देख इनकी आंखे छलक जाती थीं. जबकि वहां के लोगों को ये नहीं पता था कि ये दोनों राज कपूर के बेटे हैं,वो तो बस इंडियन समझ गाना सुनाते थे.

किसी भी सितारे-कलाकार के लिए इससे बड़ी सम्मान की बात क्या होगी कि भारत का परिचय उनके नाम और फिल्म से दिया जाए. कहते हैं कि रूस में राज कपूर को लेकर गजब की दीवानगी हुआ करती थी. वहां के लोग फिल्म ‘आवारा’ से हिंदुस्तान को समझने की कोशिश करते थे.

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