500 लेकर निकले थे धीरूभाईअंबानी , ऐसे खड़ा किया 62 हजार करोड़ का कारोबार

धीरजलाल हीराचंद अंबानी अथवा धीरूभाई अंबानी ने देश और दुनिया में कारोबार व सफलता की एक नई इबारत लिखी. 2002 में आज ही के दिन स्ट्रॉक के चलते उनका देहांत हो गया.अपने घर से 500 रुपये लेकर चलने वाले धीरूभाई ने हजारों करोड़ों का कारोबार खड़ा किया. 2002 में जब उनका देहांत हुआ, तब रिलायंस 62 हजार करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी थी. दुनिया के सबसे सफलतम लोगों में से एक धीरूभाई अंबानी की दिनचर्या तय होती थी. वह कभी भी 10 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते थे.धीरूभाई कहते थे, ” जो भी यह कहता है कि वह 12 से 16 घंटे काम करता है. वह या तो झूठा है या फिर काम करने में काफी धीमा.”हर शाम को काम के आख‍िरी घंटों में वह निवेशकों, व्याप‍ारियों और अन्य लोगों के बीच ओबेरॉय हेल्थ क्लब में बैठे रहते थे. इसी दौरान वह हर शाम को जेट मसाज लिया करते थे. मसाज के बाद वह सीधे अपने घर जाते थे.उन्हें पार्टी करना बिल्कुल पसंद नहीं था. वह हर शाम अपने परिवार के साथ बिताते थे. उन्हें ज्यादा ट्रैवल करना भी पसंद नहीं था. विदेश यात्राओं का काम ज्यादातर वह अपनी कंपनी के अध‍िकारियों पर टाल देते थे. वह तब ही ट्रैवल करते, जब ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य हो जाता
.धीरूभाई अंबानी गुजरात के एक छोटे से गांव चोरवाड़ से नाता रखते हैं. उनके पिता हीराचंद गोवरधनदास अंबानी श‍िक्षक थे. धीरूभाई का जन्म 28 दिसंबर 1932 को हुआ
.महज 17 साल की उम्र में धीरूभाई काबोटा श‍िप से यमन पहुंच गए. यहां उन्होंने ए. बेस्सी एंड कंपनी के साथ क्लर्क के तौर पर काम किया. वह यहां 300 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम किया करते थे. यहां से वह 1954 में वापस भारत आए.जेब में सिर्फ 500 रुपये लेकर वह मुंबई पहुंचे. यहां उन्होंने महज 350 वर्ग फुट के कमरे में अपने दो सहयोग‍ियों के साथ रिलायंस कॉमर्स कॉरपोरेशन की नींव रखी. उन्होंने पॉलिस्टर और मसाले के कारोबार में हाथ आजमाया.इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा और अपने कारोबार को आगे बढ़ाते रहे. रिलायंस ग्रुप बाद में दूसरे कई कारोबार में उतरा और हर जगह सफलता हासिल की.

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *