एयरफोर्स स्टेशन में रुकते थे दर्जनों मजदूर, जानकारी लीक करने का शक

एयरफोर्स स्टेशन पर हुए हमले से पहले इसकी रेकी की गई है। साथ ही अंदर की कई जानकारियां लीक करने का शक भी है। स्टेशन परिसर में 8 से 10 मंजिला आवासीय क्वार्टर वाली इमारत का निर्माण चल रहा है। इसमें सैकड़ों मजदूर काम करते हैं।
लेकिन दर्जनों मजदूर काम करने के बाद अंदर ही रुक जाते थे। ऐसे ही किसी बाहरी व्यक्ति की जान पहचान के बिना संवेदनशील क्षेत्र में रहने की अनुमति देना भी एक लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो जो मजदूर काम करने के बाद अंदर ही रुक जाते थे, इनको स्टेशन से बाहर निकाल दिया गया है। यह भी बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य कुछ दिन के लिए बंद किया गया है। मामले की जांच कर रही एनआईए स्टेशन परिसर में काम करने वाले कुछ लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
मजदूरों और ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है। सवाल उठ रहा है कि जिन मजदूरों का नाम और पता तक एयरफोर्स प्रशासन को पता नहीं, उनको भीतर रुकने की अनुमति कैसे दी गई। यह भी सुरक्षा में एक चूक और लापरवाही मानी जा रही है।

दो कर्मियों के बयान लिए गए
एनआईए की टीम ने उन दो कर्मियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्होंने हमले से पहले ड्रोन देखे थे। इन कर्मियों ने बताया कि दोनों ने ड्रोन देखे। इसके पहले कि कुछ समझ आता हमला करके ड्रोन गायब हो गए। इसके बाद यह दोनों कर्मी घटनास्थल पर गए तो घायल दो जवानों को वहां से उठाकर अस्पताल ले गए।

विस्फोटक सामग्री पाकिस्तानी कंपनी में बनी
सूत्रों का कहना है कि एनआईए की जांच टीम ने जो विस्फोटक सामग्री के सैंपल लिए हैं। उसमें इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री पाकिस्तान की एक गोला बारूद तैयार करने वाली कंपनी में बनने का शक है। ऐसी सामग्री वहां पर इस्तेमाल की जाती है।

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