प्रशांत किशोर ने यूपी समेत अन्य राज्यों के चुनावों से किया किनारा

पांच राज्यों में 2022 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टियों ने कमर कस ली है, इसी बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने चुनाव से दूर रहने और अपने अध्ययन अवकाश को बढ़ाने का फैसला किया है। इससे उनके जल्द ही किसी राजनीतिक संगठन में शामिल होने की अफवाहों पर विराम लग गया है।

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पार्टियां रणनीति तैयार करने में लग गई हैं, लेकिन कई लोगों की निगाहें इस बार किसी राजनीतिक दल से ज्यादा जाने-माने रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) पर बनी हुई हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर ‘ब्रेक’ पर चल रहे हैं और वह आने वाले चुनावों से खुद को दूर रख सकते हैं। यानी कि प्रशांत किशोर के किसी पार्टी के लिए रणनीति बनाने की संभावनाएं नहीं हैं। पिछले कुछ समय में प्रशांत के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जाती रहीं, लेकिन अब तक इस पर कोई भी फैसला नहीं हो सका है और महज अटकलें ही बनी हुई हैं।

अगले साल मार्च से पहले कोई असाइनमेंट नहीं लेंगे पीके
प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्होंने ब्रेक लेने का फैसला किया है और अगले साल मार्च से पहले कोई असाइनमेंट नहीं लेंगे। सूत्र ने कहा, ‘वह अगले साल तक किसी भी पार्टी में अंदर या बाहर से कोई भूमिका नहीं निभाएंगे। पीके ने एलान किया था कि वह जो काम करते आ रहे हैं, अब वह नहीं करेंगे। उन्होंने क्या करने का प्लान बनाया है, इसके बारे में कुछ भी कहने का समय अभी काफी शुरुआती है।’

ऐसे में इसका मतलब साफ है कि प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में कोई भूमिका निभाने के इच्छुक नहीं हैं। सूत्र ने कहा, ‘उनका यह ब्रेक मार्च 2022 के बाद भी आगे जारी रहेगा या नहीं, यह तय नहीं है।’

टीएमसी की जीत के बाद की थी ‘रिटायरमेंट’ की घोषणा
इस साल मई में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार के पद से सेवानिवृत्ति लेने का एलान कर दिया था। पीके ने चुनाव से पहले कहा था कि भाजपा दहाई का आंकड़ा नहीं पार कर सकेगी और चुनावी नतीजों में यही हुआ था। जीत के बाद पीके ने कहा था, ‘मैं इसे छोड़ने के लिए काफी समय से मन बना रहा था और बंगाल ने यह मौका दे दिया।’ अब दिलचस्प बात यह है कि पीके ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल में चुनावी रणनीतिकार की भूमिका से खुद को दूर कर लिया है।

पीके की एंट्री पर कांग्रेस में चर्चा जारी
वहीं, पीके को पार्टी में शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस में माहौल गर्मा गया है। पीके को लेकर जी-23 के वरिष्ठ नेताओं समेत कई अन्य नेताओं के साथ कांग्रेस हाई कमान ने बैठकें भी की हैं। एके एंटनी, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, जयराम रमेश, तारिक अनवर, हरीश रावत, पी चिदंबरम और अन्य की राय लिए जाने की चर्चाएं हैं। यहां तक भी कहा गया कि पिछले दिनों जन्माष्टमी के मौके पर कपिल सिब्बल के घर हुई जी-23 के नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा भी की गई। इसके बाद, नेताओं ने एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से नेतृत्व को संदेश भी दिया कि पार्टी के बाहर प्रतिभाओं की तलाश करने के बजाय पार्टी के भीतर देखने की जरूरत है।

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